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मांसाहारी भारत?

दुनिया में सबसे ज्यादा शाकाहारी किस देश में रहते हैं? जाहिर है कि भारत में रहते हैं। दुनिया का कोई देश ऐसा नहीं हैं, जिसके लाखों-करोड़ों नागरिकों ने अपने जीवन में मांस, मछली, अंडा जैसी कोई चीज़ कभी खाई ही नहीं। दुनिया का ऐसा कौन सा देश है, जिसमें इन पदार्थों को ‘अखाद्य’ (न खाने योग्य) माना गया है? भारत के अलावा कोई भी नहीं।

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मनुष्य का सैद्धांतिक और नीतिगत भोजन शाकाहार है, मांसाहार नहीं

भोजन की बात होती है – तो सैद्धांतिक तौर पर – भोजन वो होना चाहिए – जिससे न तो किसी का दोष लगा हो – ना पाप करके चोरी करके लाये हो – न ही हत्या अथवा हिंसा करके –

हिंसा कहते हैं – जो वैर भाव से किया गया कृत्य हो।

लेकिन यदि हम भोजन के तौर पर देखे की क्या खाया जाये – तो एक निर्धारण होता है – एक नियम है – उसकी और ध्यान देना आवश्यक है – क्योंकि ईश्वर ने मनुष्य बनाया तो उसकी भोजन सामग्री भी अवश्य बनाई होगी और वो ऐसी होनी चाहिए जो सुगम हो सर्वत्र हो आकर्षित करने वाली हो – जो हमारे खाने योग्य हो –

तो…

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गाय अपने आप में चमत्कारी प्रयोगशाला हैं

THE COW IS A WONDERFUL LABORATORY ” के अनुसार प्रकृति ने समस्त जीव-जंतुओं और सभी दुग्धधारी जीवों में केवल गाय ही है जिसे ईश्वर ने 180 फुट (2160 इंच ) लम्बी आंत दी है जिसके कारण गाय जो भी खाती-पीती है वह अंतिम छोर तक जाता है |…

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मांसाहार और शाकाहार भोजन पर चर्चा कितनी सार्थक -हिंदी आलेख

कुछ विद्वान मांसाहार को सही साबित करने के लिये कुछ अधिक ही अध्यात्मिक ज्ञान का बखान करते हुए विज्ञान का भी हवाला देते हैं, तब हंसी आती है। वैसे यह पश्चिमी विज्ञान की मान्यता नहीं है कि पेड़ पौद्यों में भी जीवन होता है बल्कि भारतीय अध्यात्म दर्शन भी इस बात की पुष्टि करता है कि वनस्पतियों में भी जीवन का स्पंदन होता है। ऐसे में मांसाहारी विद्वान दावा करते हैं कि जब सब्जी या अन्य शाकाहार पदार्थों के उत्पादन, जड़ से प्रथकीकरण तथा सेवन करने पर भी अन्य जीव की हत्या होती है ऐसे में पशु या पक्षियों को मारकर खाने को ही मांसाहार मानते हुए उसे पाप कैसे माना जाये?…

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शाकाहार स्वस्थ जीवन व पर्यावरण की रक्षा

जैसे कि हमारे जीवन में हरियाली का महत्व है, वैसे ही हरा भरा वायुमण्डल स्वच्छ व स्वास्थ्यवर्धक होता है। इसलिए शाकाहार का हमारे जीवन में महत्व है। शाकाहार हमारे जीवन को स्वस्थ व दीर्घायु बनाता है। मांसाहार कई रोग पैदा करता है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, रक्त व चर्म रोग, पीलिया, पेट के विभिन्न रोग, कैंसर, किडनी के रोग, मानसिक विकार की संभावना मांसाहारियों में अधिक होती है। नियमित रूप से मांस का सेवन करने से रक्त वाहिनियों में कोलेस्ट्रोल जमा हो जाता है। मांसाहार का पाचन तंत्र पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। मांस अधिक खाने से लीवर खराब होता है। इससे पीलिया हो जाता है। मांस में विभिन्न रोगों के कीटाणु होते हैं। पशु किसी रोग से संक्रमित हो तो वे कीटाणु मांस खाने वालों के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। मांसाहारी प्रायः आक्रामक, हिंसक व अत्यधिक तनाव के शिकार होते हैं जिससे हाइपरटेंशन होता है। उनका मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है। चिकन (मुर्गा) खाने से कई रोग शरीर में संक्रमित हो जाते हैं प्रायः मुर्गे व मुर्गियां किसी न किसी रोग से ग्रस्त होती हैं। जिनका सेवन शरीर को रोगग्रस्त करता है।…

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